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मरीचिका

 

मन दौड़ता रहा,
शब्दों को खंगालता,
तलाशता.

सभी के पास
शब्दवेधी बाण,
ब्रह्मास्त्र.

सत्य खुद में छुपा,
कस्तूरी उसी की,
पर अनजान.

जिसकी भीनी खुशबू,
से बौराया मन दे,
नित अपरिचित तान.

लगा अभी खुद से,
बाकी है पहचान,
फिर भी..

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A busy mom!

2 thoughts on “मरीचिका

  1. सभी के पास
    शब्दवेधी बाण,
    ब्रह्मास्त्र.
    भावनाओं को सजीव करते शब्द बोलतीं पंक्तियाँ ,सुन्दर ! आभार “एकलव्य”

    1. बहुत बहुत धन्यवाद् ध्रुव। पाठकों की रूचि हमें अच्छा लिखने की प्रेरणा देती है।

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