बादल

बहुत ऊपर
कवियों-किस्सों के देश में
बादलों का राज
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नन्हा फतिंगा
उड़ा बादलों के पार
अचकचाया
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बिजली चमकती
रूई के फाहे जब टकराते
जमीनवाले डर जाते
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छोटे दिन-रात
सिमटे न समायें
सपने आकाश
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जीवन ईश्वर
भाव सुवासित धूम्र
कर्म पूजन
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दरिया कोशिशें
तिनका जो हाथ आया
संतोष गहराया
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